Poetic Title: “खामोशी का योद्धा — Guru Tegh Bahadur Ji को समर्पित” (The Warrior of Silence) ✨ Poetic Content आज का दिन इक कहानी नहीं, इक धड़कन है… जो सदियों से चाँदनी चौक की हवा में धीरे–धीरे साँस लेती है। वो दिन— जब एक संत मौत के सामने खड़ा था, पर मौत काँप रही थी उसकी मुस्कान से। जब हथियारों की नहीं, आवाज़ों की लड़ाई थी… और उसने अपने शब्दों से नहीं, खामोशी से इतिहास बदला। कहते हैं— राजाओं की तलवारें तेज थीं, पर एक संत की नज़र में सच की चमक ज़्यादा थी। वो निडर था… क्योंकि उसका साहस किसी राजसभा से नहीं, किसी बादशाह से नहीं, सीधे ईश्वर से आता था। वो जानता था— सिर कट सकता है, पर सत्य नहीं। शरीर गिर सकता है, पर धर्म की इज़्ज़त नहीं। मौत छू सकती है, पर मन को नहीं। उसके एक कदम से कई सभ्यताएँ बचीं, उसकी एक साँस से कई पंथ ज़िंदा रहे, उसके एक बलिदान से आज तक इंसानियत चलती है। और आज… जब दुनिया शोर से भरी है, जब सच भी भीड़ में खो जाता है, जब इंसान विचारों से नहीं, डर से जीता है… उसका बलिदान और भी ऊँचा लगता है। कभी–कभी लगता है वो हमारे आज के ...